क्या सीबीआई स्पेशल कोर्ट के जज बीएच लोया की मौत स्वाभाविक थी या इसकी जांच की जरूरत है? इस पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को फैसला सुना सकता है. जज लोया की मौत की दोबारा जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं. जिसपर 16 मार्च को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला 19 अप्रैल तक के लिए सुरक्षित रख लिया था.

दरअसल, सीबीआई के स्पेशल जज बीएच लोया सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे. उनकी मौत 1 दिसंबर 2014 को नागपुर में तब हुई थी, जब वे अपने सहयोगी की बेटी की शादी में जा रहे थे. बताया जाता है कि जज लोया को कार्डिएक अरेस्ट (दिल का दौरा) आया था. नवंबर 2017 में जज लोया की मौत के हालात पर उनकी बहन ने शक जाहिर किया. जज लोया कि बहन के मुताबिक, उनकी मौत नैचुरल नहीं थी. इसके तार सोहराबुद्दीन एनकाउंटर से जोड़े गए. जिसके बाद यह केस मीडिया की सुर्खियां बना.

इन लोगों ने दायर की थी याचिकाएं
मीडिया में मामला आने के बाद जज लोया की मौत की दोबारा जांच की मांग उठने लगे. इसके बाद कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला, पत्रकार बीएस लोने, बांबे लॉयर्स एसोसिएशन सहित अन्य लोगों ने अदालत में याचिकाएं दायर की. इन याचिकाओं में जज लोया की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी. 16 मार्च को इन याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हुई थी. जिसपर कोर्ट आज फैसला देगा.



तीन जजों की बेंच सुनाएगी फैसला
बता दें कि जज लोया केस की सुनवाई करने वाले सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस ए.एम. खानविल्कर शामिल हैं.

कब उठा था जज लोया की मौत का मामला?
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के 4 सीनियर जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस चेलमेश्वर ने 12 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेआई दीपक मिश्रा पर कोर्ट के सही संचालन ना करने पर सवाल उठाया था. उनका आरोप था कि शीर्ष अदालत में कुछ मामलों की सुनवाई के लिए चयनित न्यायिक पीठ का गठन किया गया है. इन चारों जजों ने सीबीआई के जज लोया की मौत का मामला भी उठाया था.
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